Holy scripture

Friday, May 8, 2020

मांस खाना पाप है।




एक समय एक संत अपने शिष्य के साथ कही जा रहा था। वहां पर एक मछुआरा तालाब से मछलियां पकड़ रहा था ।मछलियां जल से बाहर तड़प तड़प कर प्राण त्याग रही थी। शिष्य ने पूछा .?  है गुरुदेव इस अपराधी प्राणी को क्या दंड मिलेगा। गुरुजी ने कहा बेटा समय आने पर बताऊंगा । चार-पांच वर्ष के पश्चात दोनों गुरु शिष्य कहीं जाने के लिए जंगल से गुजर रहे थे ।वहां पर एक हाथी का बच्चा चिला रहा था। उछल कूद करते समय हाथी का बच्चा दो निकट निकट व्रक्ष के बीच में फस गया । वह निकल तो गया परन्तु  निकलने के प्रयत्न में उसका शरीर छिल  गया था। तथा उसके शरीर में जख्म हो गए थे। उसके सारे शरीर में कीड़े चल रहे थे जो उस को नोच रहे थे। वह हाथी का बच्चा बुरी तरह चिल्ला रहा था। शिष्य ने गुरुजी से पूछा कि गुरुदेव यह प्राणी कौन से पाप का दंड भोग रहा है।गुरुदेव ने कहा पुत्र यह वही है जो उस समय के उस शहर के बाहर जलाशय से मछलियां निकाल रहा था।






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