संत रामपाल जी महाराज कि पूरे विश्व के अंदर दहेज जैसी कुप्रथा को बंद कर रहै है । और लाखों परिवार सुखी हो रही है।
गरिमा गीता की (गीता जी का दिव्य सारांश) Who is God? He's been described as everything from an impersonal life-force to a benevolent, personal, almighty Creator. He has been called by many names, including: "Zeus," "Jupiter," "Brahma," "Allah," "Ra," "Odin," "Ashur," "Izanagi," "Viracocha," "Ahura Mazda," and "the Great Spirit" to name just a few. He's seen by some as "Mother Nature" and by others as "Father God." But who is He really? Who does He claim to be?
▼
Holy scripture
▼
Wednesday, May 20, 2020
दहेज़ प्रथा एक सामाजिक अभिशाप
दहेज के कारण बेटी परिवार पर भार मानी जाती है। पैसा अपनी मेहनत, ईमानदारी से कमाइये। दहेज़ के लिए किसी के आगे हाथ मत फैलाइए। दहेज के कारण लाखों बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है जो कि बहुत बड़ा महापाप है। और देश के लिए बेटे को बेचना बंद करो। दहेज़ के रूप में भीख मांगना बंद करो। अपनी मेहनत से और इज्जत से धन कमाओ।
Wednesday, May 13, 2020
नशा करता है नाश
नशा चाहे शराब,सुल्फा, अफीम, हीरोइन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा। नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है ।फिर शरीर का नाश करता है । शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं:-1.फेफड़े,2.लीवर, 3. गुर्दे, 4.ह्रदय ।
शराब सर्वप्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है। सुल्फा दिमाग को पूरी तरह नष्ट कर देता है। हीरोइन शराब से भी अधिक शरीर को खोखला करती है ।अफीम से शरीर कमजोर हो जाता है ।
अपनी कार्यशैली छोड़ देता है ।अफीम से ही चार्ज होकर चलने लगता है। रक्त दूषित हो जाता है ।इसलिए इनको तो गांव - नगर में भी नहीं रखें, घर की बात क्या । सेवन करना तो सोचना भी नहीं चाहिए ।
नशे जैसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए अवस्य देखिए साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे सन्त रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन
Friday, May 8, 2020
मांस खाना पाप है।
एक समय एक संत अपने शिष्य के साथ कही जा रहा था। वहां पर एक मछुआरा तालाब से मछलियां पकड़ रहा था ।मछलियां जल से बाहर तड़प तड़प कर प्राण त्याग रही थी। शिष्य ने पूछा .? है गुरुदेव इस अपराधी प्राणी को क्या दंड मिलेगा। गुरुजी ने कहा बेटा समय आने पर बताऊंगा । चार-पांच वर्ष के पश्चात दोनों गुरु शिष्य कहीं जाने के लिए जंगल से गुजर रहे थे ।वहां पर एक हाथी का बच्चा चिला रहा था। उछल कूद करते समय हाथी का बच्चा दो निकट निकट व्रक्ष के बीच में फस गया । वह निकल तो गया परन्तु निकलने के प्रयत्न में उसका शरीर छिल गया था। तथा उसके शरीर में जख्म हो गए थे। उसके सारे शरीर में कीड़े चल रहे थे जो उस को नोच रहे थे। वह हाथी का बच्चा बुरी तरह चिल्ला रहा था। शिष्य ने गुरुजी से पूछा कि गुरुदेव यह प्राणी कौन से पाप का दंड भोग रहा है।गुरुदेव ने कहा पुत्र यह वही है जो उस समय के उस शहर के बाहर जलाशय से मछलियां निकाल रहा था।
अधिक जानकारी के लिए देखें संत रामपाल जी महाराज जी मंगल प्रवचन .......
साधना टीवी शाम 7:30pm
संत रामपाल जी महाराज जी के द्वारा लिखित पुस्तकें निशुल्क मंगवाने के लिए अपना नाम,पूरा पता हमें Whatsapp करें 7496801825 पर
संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग सुनने के लिए हमारी वेबसाइट पर Visit करें.
Thursday, May 7, 2020
कलयुग में सतयुग
सतयुग उस समय को कहते हैं जिस युग में अधर्म नहीं होता ।शांति होती है ।पिता से पहले पुत्र की मृत्यु नहीं होती, स्त्री विधवा नहीं होती, रोग रहित शरीर होता है ।सिर्फ मानव भक्ति करते हैं। परमात्मा से डरने वाले होते हैं। क्योंकि वे आध्यात्मिक ज्ञान के सर्व कर्मों से परिचित होते हैं। मन, कर्म ,वचन से किसी को पीड़ा नहीं देते। तथा दुराचारी नहीं होते, जति- सती, स्त्री पुरुष होते हैं ।
पक्षियों की अधिकता होती है। सिर्फ मनुष्य वेदों के आधार से भक्ति करते हैं ।वर्तमान में कलयुग है ।इसमें अधर्म बढ़ चुका है। कलयुग में मानव के भक्ति के प्रति आस्था कम हो जाती है । या तो भक्ति करते ही नहीं, यदि करते हैं तो शास्त्र विधि त्याग कर मनमानी भक्ति करते हैं ।जो श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23,24 में वर्जित है। जिस कारण से परमात्मा से जो लाभ वंचित होता है। वह परमात्मा नहीं होता इसलिए अधिकतर मनुष्य नास्तिक हो जाते हैं धनी बनने के लिए रिश्वत,चोरी,डाका डालना को माध्यम बनाते हैं। परन्तु यह विधि धन लाभ न होने के कारण परमात्मा के दोषी हो जाते हैं। तथा प्राकृतिक कष्टों को झेलते है। परमेश्वर के विधान को मानव भूल जाता है। किस्मत से अधिक प्राप्त नहीं हो सकता यदि अन्य अवैध विधि से धन प्राप्त कर लिया तो वह रहेगा नहीं। जैसे एक व्यक्ति अपने पुत्र को सुखी देखने के लिए अवैध विधि से धन प्राप्ति करता था । कुछ दिनों पश्चात उसके पुत्र के दोनों गुर्दे खराब हो गए। जैसे-तैसे करके गुर्दे बदलवाए। तीन लाख रुपये खर्च हुआ। जो अवैध विधि से जुड़ा था वह सब खर्च हो गया। तथा कुछ समय बाद कर्जा भी हो गया। फिर लड़के का विवाह हुआ 6 महीने के पश्चात बस दुर्घटना में इकलौता पुत्र मृत्यु को प्राप्त हुआ । अब ना तो पुत्र रहा और ना ही अवैध विधि से अर्जित किया गया धन।
शेष क्या रहा...?
अवैध विधि से धन संग्रह करने में किए हुए पाप जो अभी शेष है । उनको भोगने के लिए जिस -जिस पैसे लिए थे । उनको गधा बैल गाय बनकर पूरा करेगा। परंतु परम अक्षर ब्रह्म की साधना करने वाला भक्त की किस्मत को परमेश्वर बदल देता है । क्योंकि परमेश्वर के गुणों में लिखा है, परमात्मा निर्धन को धनवान बना देता है ।सतयुग में कोई भी प्राणी मांस,तम्बाकू, मंदिरा सेवन नहीं करता है ।क्योंकि वह इनसे होने वाले पापों से परिचित होते हैं।
अधिक जानकारी के लिए देखिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन ..
रोजाना शाम को साधना टीवी पर 7:30Pm पर
संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पवित्र पुस्तकें निःशुल्क मंगवाने के लिए अपना नाम पता मोबाइल नंबर कमेंट करें।
हमारा whatsapp नंबर है। 7496801825
ओर अधिक जानकारी के लिए visit करें हमारी Website पर
हमारी Website है ......
यहां क्लिक करें...
👇👇👇👇
Wednesday, May 6, 2020
अंधश्रद्धा भक्ति खतरा ए जान
अंधश्रद्धा भक्ति खतरा ए जान
शिव लिंग की पूजा कैसे प्रारंभ हुई
पूर्व काल में जो पहला कल्प जो लोक में विख्यात है। उसमें महात्मा ब्रह्मा और विष्णु का परस्पर युद्ध हुआ । उनके मान को दूर करने को उनके बीच में निष्कल पल परमात्मा ने स्तम्भरूप अपना स्वरूप दिखाया। तब जगत की हित की इच्छा से निर्गुण शिव ने उस तेजोमयस्तम्भ से अपना लिंग आकार का स्वरूप दिखाया उस दिन से लोक में वह निष्कल शिवजी का लिंग विख्यात हुआ।
इसके पश्चात यह बेशर्म पूजा सब हिंदुओं में देखा देखी चल रही है। आप मंदिर में शिवलिंग को देखना उसके चारों और स्त्री इंद्री का चित्र है। जिसमें शिवलिंग प्रविष्ट दिखाई देता है ।यह पूजा काल ब्रह्मा ने प्रचलित करके मानव समाज को दिशाहीन कर दिया वेदों तथा गीता के विपरीत साधना बता दी।
अधिक जानकारी के लिए पढ़िए पुस्तक ज्ञान गंगा व जीने की राह निशुल्क मंगवाने के लिए अपना नाम पता मोबाइल नंबर हमें Whatsapp करें। 7496801825


