Holy scripture

Wednesday, July 15, 2020

नशा तेजी से क्यों फैलता है।

नशा तेजी से क्यों फैलता है।

जानिए समाज मे तेज़ी से क्यों फैल रहा है नशा,पढ़िये इस रिपोर्ट में।

मादक चीजों में आजकल नशीली दवाओं का नशा सभी प्रकार के लोगों में बढ़ता चला जा रहा है ।
नशीली दवाओं की बढ़ती लत पूरी पीढ़ी को समाप्त कर रही है। यह स्थिति आने वाली पीढ़ी के सामाजिक और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए बड़ी गंभीर चुनौती है ।नई पीढ़ी नशीली दवाओं की ओर बड़ी तेजी से आकर्षित हो रही है एक पूरी पीढ़ी नशे की गर्त में डूब रही है।


आइए इस  की पड़ताल करें।।

 मादक द्रव्यों का प्रयोग एवं नशे की बढ़ती लत आजकल गंभीर चिंता का विषय है। आज की स्थिति में आने वाली पीढ़ी के लिए सामाजिक व्यवस्था में सामने और सामाजिक एवं व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए प्रश्नवाचक बन जाएगी।प्राचीन भारत में सोमरस का प्रयोग किया जाता था जो ऋषि मुनि युग दृष्टा होते थे। उनके द्वारा इष्ट सिद्धि के क्रम में व्यवधान ना हो इस उद्देश्य से चित्तवृत्ति निरोध के लिए सोमपान पर चित्र मध्य युग में स्वस्थ जीवन के लिए मादक द्रव्यों का सेवन किया जाता था। उन्हें सामाजिक आवश्यकता समझा जाता था। पर आयुष अभिजात्य वर्ग इनका उपयोग  अधिक करते है। समाज में वर्ण व्यवस्था के अनुसार ही विभिन्न वर्णों के रीति रिवाज आहार व्यवहार वस्त्र आभूषण तथा जब शादी निर्धारित कर रहे हैं। आज भी मादक द्रव्यों का प्रयोग का संबंध धर्म जाति तथा वर्ग समय में देखने को मिलता है ।

शराब पीने की आदत लगभग सभी देशों के लोगों में सभी समय रही है। इसके विनाशकारी प्रभाव से परिचित होते हुए भी लोग शराब को नहीं छोड़ पाते। शराब पीने से हजारों घर बर्बाद हो गए हैं और लाखों लोग मौत के शिकार हो गए हैं इन सब का अंतिम परिणाम समाज और देश को भुगतना पड़ता है। आपके आसपास गांव कस्बा शहर में ऐसे हजारों उदाहरण हैं जिन्हें शराब पी गई और परिवार नष्ट हो गया।सस्ती शराब या नकली शराब पीकर दिल्ली मुंबई अहमदाबाद जैसे शहरों में आए दिन सैकड़ों लोग मौत की नींद सो जाते हैं।
 मांस शराब जुआ औरत का हमेशा से ही आकर्षण का कारण माना गया है। फिर पीने का मजा संगति में लेने के कारण शराब और ज्यादा नुकसानदायक हो जाती है

नशे से कैसे बचा जा सकता है।

आइये आपको बताते है की नशा से कैसे बचा जा सकता है।
और वो भी बिना किसी दवाई के और बिना किसी पैसे से नशा छोड़ सकते है।

 संत रामपाल जी महाराज जी का सत्संग सुनकर ओर उनसे नाम दीक्षा लेकर और उनके बताए हुए मार्ग पर चलोगे तो आपको नशे जैसी भयंकर बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा
आज लाखों लोगों के घर खुशहाल हो गए है। उनको नया जीवन मिल गया।
संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर भक्ति करने से सारी बुराई छूट जाती है।
भयंकर से भयंकर बीमारी जैसे केंसर एड्स, आदि बीमारी भी ठीक हो जाती है।


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Wednesday, June 17, 2020

Wednesday, May 20, 2020

दहेज़ प्रथा एक सामाजिक अभिशाप

दहेज के कारण बेटी परिवार पर भार मानी जाती है। पैसा अपनी मेहनत, ईमानदारी से कमाइये। दहेज़ के लिए किसी के आगे हाथ मत फैलाइए। दहेज के कारण लाखों बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है जो कि बहुत बड़ा महापाप है। और देश के लिए बेटे को बेचना बंद करो। दहेज़ के रूप में भीख मांगना बंद करो। अपनी मेहनत से  और इज्जत से धन कमाओ।

संत रामपाल जी महाराज कि पूरे विश्व के अंदर दहेज जैसी कुप्रथा को बंद कर रहै है । और लाखों परिवार सुखी हो रही है।
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Wednesday, May 13, 2020

नशा करता है नाश

नशा चाहे शराब,सुल्फा, अफीम, हीरोइन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश  का कारण बनेगा। नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है ।फिर शरीर का नाश करता है । शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं:-1.फेफड़े,2.लीवर, 3. गुर्दे, 4.ह्रदय ।
शराब सर्वप्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है। सुल्फा दिमाग को पूरी तरह नष्ट कर देता है। हीरोइन शराब से भी अधिक शरीर को खोखला करती है ।अफीम से शरीर कमजोर हो जाता है ।
 अपनी कार्यशैली छोड़ देता है ।अफीम से ही चार्ज  होकर चलने लगता है। रक्त दूषित हो जाता है ।इसलिए इनको तो गांव - नगर में भी नहीं रखें, घर की बात क्या । सेवन करना तो सोचना भी नहीं चाहिए ।
नशे जैसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए अवस्य देखिए साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे सन्त रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन 

Friday, May 8, 2020

मांस खाना पाप है।




एक समय एक संत अपने शिष्य के साथ कही जा रहा था। वहां पर एक मछुआरा तालाब से मछलियां पकड़ रहा था ।मछलियां जल से बाहर तड़प तड़प कर प्राण त्याग रही थी। शिष्य ने पूछा .?  है गुरुदेव इस अपराधी प्राणी को क्या दंड मिलेगा। गुरुजी ने कहा बेटा समय आने पर बताऊंगा । चार-पांच वर्ष के पश्चात दोनों गुरु शिष्य कहीं जाने के लिए जंगल से गुजर रहे थे ।वहां पर एक हाथी का बच्चा चिला रहा था। उछल कूद करते समय हाथी का बच्चा दो निकट निकट व्रक्ष के बीच में फस गया । वह निकल तो गया परन्तु  निकलने के प्रयत्न में उसका शरीर छिल  गया था। तथा उसके शरीर में जख्म हो गए थे। उसके सारे शरीर में कीड़े चल रहे थे जो उस को नोच रहे थे। वह हाथी का बच्चा बुरी तरह चिल्ला रहा था। शिष्य ने गुरुजी से पूछा कि गुरुदेव यह प्राणी कौन से पाप का दंड भोग रहा है।गुरुदेव ने कहा पुत्र यह वही है जो उस समय के उस शहर के बाहर जलाशय से मछलियां निकाल रहा था।






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Thursday, May 7, 2020

कलयुग में सतयुग

सतयुग उस समय को कहते हैं जिस युग में अधर्म नहीं होता ।शांति होती है ।पिता से पहले पुत्र की मृत्यु नहीं होती, स्त्री विधवा नहीं होती, रोग रहित शरीर होता है ।सिर्फ मानव भक्ति करते हैं। परमात्मा से डरने वाले होते हैं। क्योंकि वे आध्यात्मिक ज्ञान के सर्व कर्मों से परिचित होते हैं। मन, कर्म ,वचन से किसी को पीड़ा नहीं देते। तथा दुराचारी नहीं होते, जति- सती, स्त्री पुरुष होते हैं ।

पक्षियों की अधिकता होती है। सिर्फ मनुष्य वेदों के आधार से भक्ति करते हैं ।वर्तमान में कलयुग है ।इसमें अधर्म बढ़ चुका है। कलयुग में मानव के भक्ति के प्रति आस्था कम हो जाती है । या तो भक्ति करते ही नहीं, यदि करते हैं तो शास्त्र विधि त्याग कर मनमानी भक्ति करते हैं ।जो श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23,24 में वर्जित है। जिस कारण से परमात्मा से जो लाभ वंचित होता है। वह परमात्मा नहीं होता इसलिए अधिकतर मनुष्य नास्तिक हो जाते हैं धनी बनने के लिए रिश्वत,चोरी,डाका डालना को माध्यम बनाते हैं। परन्तु यह विधि धन लाभ न  होने के कारण परमात्मा के दोषी हो जाते हैं। तथा प्राकृतिक कष्टों को झेलते है। परमेश्वर के विधान को मानव  भूल जाता है। किस्मत से अधिक प्राप्त नहीं हो सकता यदि अन्य अवैध विधि से धन प्राप्त कर लिया तो वह रहेगा नहीं। जैसे एक व्यक्ति अपने पुत्र को सुखी देखने के लिए अवैध विधि से धन प्राप्ति करता था । कुछ दिनों पश्चात उसके पुत्र के दोनों गुर्दे खराब हो गए।  जैसे-तैसे करके गुर्दे बदलवाए। तीन लाख रुपये खर्च हुआ। जो अवैध विधि से जुड़ा था वह सब खर्च हो गया। तथा कुछ समय  बाद कर्जा भी हो गया। फिर लड़के का विवाह हुआ 6 महीने के पश्चात बस दुर्घटना में इकलौता पुत्र मृत्यु को प्राप्त हुआ । अब ना तो पुत्र रहा और  ना  ही अवैध विधि से  अर्जित किया गया धन।

 शेष क्या रहा...? 
 अवैध विधि से धन संग्रह करने में किए हुए पाप जो अभी शेष है । उनको भोगने के लिए जिस -जिस पैसे  लिए थे । उनको गधा बैल गाय बनकर पूरा करेगा। परंतु परम अक्षर ब्रह्म की साधना  करने वाला भक्त  की किस्मत को परमेश्वर बदल देता है । क्योंकि परमेश्वर के गुणों में लिखा है, परमात्मा निर्धन को धनवान बना देता है ।सतयुग में कोई भी प्राणी मांस,तम्बाकू, मंदिरा सेवन नहीं करता है ।क्योंकि वह इनसे होने वाले पापों से परिचित होते हैं।


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Wednesday, May 6, 2020

अंधश्रद्धा भक्ति खतरा ए जान


अंधश्रद्धा भक्ति खतरा ए जान


शिव लिंग की पूजा कैसे प्रारंभ हुई


पूर्व काल में जो पहला कल्प जो लोक में विख्यात है।  उसमें महात्मा ब्रह्मा और विष्णु का परस्पर युद्ध हुआ । उनके मान को दूर करने को उनके बीच में निष्कल  पल परमात्मा ने स्तम्भरूप अपना स्वरूप दिखाया। तब जगत की हित की इच्छा से निर्गुण शिव ने उस तेजोमयस्तम्भ  से अपना लिंग आकार का स्वरूप दिखाया उस दिन से लोक में वह  निष्कल  शिवजी का लिंग विख्यात हुआ।


इसके पश्चात यह बेशर्म पूजा सब हिंदुओं में देखा देखी चल रही है। आप मंदिर में शिवलिंग को देखना उसके चारों और स्त्री इंद्री का चित्र है। जिसमें शिवलिंग प्रविष्ट दिखाई देता है ।यह पूजा काल ब्रह्मा  ने प्रचलित करके मानव समाज को दिशाहीन कर दिया वेदों तथा गीता के विपरीत साधना बता दी।

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