Saturday, December 22, 2018

पवित्र गीता जी का ज्ञान किसने कहा?

पवित्र गीता जी का ज्ञान को उस समय बोला गया था जब महाभारत का युद्ध होने जा रहा था अर्जुन ने युद्ध करने से इनकार कर दिया था युद्ध क्यों हो रहा था इस युद्ध को धर्म युद्ध की संख्या भी नहीं दी जा सकती क्योंकि दो परिवारों का संपत्ति विवरण का विषय था कोरव तथा पांडवों का सम्पत्ति बटवारा नहीं हो रहा था कौरवों ने पांडवों को आधा राज्य भी देने से मना कर दिया था दोनों पक्षों का बीच बचाव करने के लिए प्रभु श्री कृष्ण जी 3 बार शांतिदूत बनकर गए पर  दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अटल थे श्री कृष्ण जी ने युद्ध से होने वाली हानि से भी परिचित कराते हुए कहा कि ना जाने कितनी बहन विधवा होगी ना जाने कितने बच्चे अनाथ होंगे मां-बाप के अतिरिक्त कुछ नहीं मिलेगा युद्ध में ना जाने कौन मरे कौन बच्चे तीसरी बार जब श्री कृष्ण जी समझोता करवाने गए तो दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष वाले राजाओं की सेना सहित सूची पत्र दिखाया तथा कहा कि कितने राजा हमारे
www.SupremeGod.orgपक्ष में है तथा इतने हमारे पक्ष में जब श्री कृष्ण जी ने देखा कि दोनों ही पक्ष टस से मस नहीं हो रहे हैं युद्ध के लिए तैयार हो चुके हैं तब श्री कृष्ण जी ने सोचा कि एक दांव ओर है वह भी आग लगा देता हूं श्री कृष्ण जी ने सोचा कि कहीं पांडव मेरे संबंधी होने के कारण अपने इसलिए नहीं छोड़ रहे हो कि श्री कृष्ण हमारे साथ है विजय हमारी ही होगी                                         
 क्योंकि श्री कृष्ण जी की बहन सुभद्रा जी का विवाह श्री अर्जुन जी से हुआ था श्री कृष्ण जी ने कहा कि एक तरफ मेरी  सेना होगी और दूसरी तरफ में होगा और इसके साथ साथ में वचनबद्ध भी होता हूं कि मैं पहथियार भी नहीं उठाऊंगा इस घोषणा से पांडवों के पैरों के नीचे की जमीन किस गई उनको लगा कि अब हमारी पराजय निश्चित है यह विचार कर पांच पांडव है कस्बा से बाहर गए कि हम कुछ विचार कर ले कुछ समय उपरांत श्री कृष्ण जी को सुबह से बाहर आने की प्रार्थना की श्री कृष्ण जी के बाहर आने पर पांडवों ने कहा कि हे भगवान हमें 5 गांव दिलवा दो हम युद्ध नहीं चाहते हैं हमारी इज्जत भी रह जाएगी और आप चाहते हैं कि उसने हो यह भी टल जाएगा पांडवों की इस फैसले से श्री कृष्ण जी बहुत प्रसन्न हुए तथा सोचा कि बुरा समय टल गया सभा में केवल गौरव तथा उनके समर्थक सोचते श्री कृष्ण जी ने कहा दुर्योधन युद्ध चल गया है मेरी भी यह हार्दिक इच्छा थी आप पांडवों को 5 गांव दे दो वह कह रहे हैं कि हम युद्ध नहीं चाहते दुर्योधन ने कहा कि पांडवों के लिए सुई की नोक तुल्य भी जमीन नहीं है यदि उन्हें चाहिए तो युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र के मैदान में आ जाए इस बात से श्री कृष्ण जी ने नाराज होकर कहा कि दुर्योधन तू इंसान नहीं शैतान है कहां आधा राज्य और कहां पांच गांव मेरी बात मान ले 5 गांव देदे श्री कृष्ण से नाराज होकर दुर्योधन ने सभा में उपस्थित योद्धाओं को याद दी कि श्रीकृष्ण को पकड़ा था कारागृह में डाल दो आज्ञा मिलते ही योद्धाओं ने श्री कृष्ण जी के चारों तरफ से घेर लिया श्री कृष्ण जी ने अपना विराट रूप दिखाया जिसका ना सर्वर योद्धा और कुर्सियों के नीचे घुस गए तथा शरीर के तेज प्रकाश से आंखें बंद हो गई श्री कृष्ण जी वहां से निकल गए

 





नशा तेजी से क्यों फैलता है।

नशा तेजी से क्यों फैलता है। जानिए समाज मे तेज़ी से क्यों फैल रहा है नशा,पढ़िये इस रिपोर्ट में। मादक चीजों में आजकल नशीली दवाओं का नशा ...