भगति से भगवान तक

      जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।    हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,धर्म नहीं कोई न्यारा।।

अन्धश्रदा भगति
                     मूर्ति पूजा क्या है ?
मूर्ति पूजा के अंतर्गत अंध श्रद्धालुओं लोगों को कई प्रावधान बताए गए हैं:-

श्री विष्णु जी,श्री शिवजी, श्रीदेवी, दुर्गा माता जी, श्री गणेश जी ,श्री लक्ष्मी जी, श्री पार्वती जी, तथा अन्य लोग प्रसिद्ध देवी देवताओं की मूर्तियों की पूजा यानी उनको प्रतिदिन स्नान करवाना नए वस्त्र पहनाना ,तिलक लगाना उनपर फूल चढ़ाना अच्छा भोजन बनाकर उनके मुख को भोजन लगाकर भोजन खाने की प्रार्थना करना दूध पिलाना, अगरबत्ती व ज्योति जला कर उनकी आरती उतारना उनसे फिर  परिवार में सुख शांति समृद्धि के लिए प्रार्थना करना नौकरी रोजगार संतान प्राप्ति के लिए अर्ज करना आदि आदि तथा शिवजी के लिंग यानी गुप्तांग की पूजा करना उस लिंक पर दूध  डालना उसके ऊपर ताँबे या पीतल का  स्टैंड रखकर तांबे या पीतल का घड़ा के नीचे तली में बारीक छेद करके पानी से भर कर रखने  से लगातार लिंग के ऊपर जल की धारा गिरती रहे यह मूर्ति पूजा है
:-👉 निवेदन श्रीमद भगवत गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 24 में स्पष्ट निर्देश है कि जो शास्त्रों में वर्णित की क्रियाओं के अतिरिक्त साधन करते हैं उनको ना सुख की प्राप्ति होती है न सुख की यानी  आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है ,न ही उनको गति यानी मोक्ष की प्राप्ति होती है अर्थात  व्यर्थ पूजा है वह नहीं करनी चाहिए क्योंकि साधक इन तीन लाभो  के लिए ही परमात्मा की भक्ति करता है इसलिए धार्मिक क्रियाएं  त्याग देनी चाहिए जो गीता वेदों जैसे प्रभुतत शास्त्रों में वृर्णित नही है  उपरोक्त मूर्ति पूजा का वेदो तथा गीता में उल्लेख न होने से शास्त्र विरुद्ध साधना है


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